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Sunday, February 04, 2018

तेरे सीने से मेरे सीने तक


वो चली
अटखेली
तेरे सीने से
मेरे सीने तक|

मैं होश बचाकर क्या जीतूँ ?
तुझे आँख चुराकर क्या हासिल?
हम मिलकर साँस -साँस बोएँ,
दो दिलके आस-पास बोएँ,
जन्मे तो दोनों का हिस्सा,
कुछ मेरा- कुछ तेरा किस्सा,
एक मीठी-सी
निम्बोली
तेरे सीने से
मेरे सीने तक|

तू बारिश हो ले भादो की
मैं अगहन की सौंधी-सी धूप ,
हम साथ-साथ थिरकें-ठिठकें
ले-लेकर एक-दूजे का रूप!
हम कभी मेंड़ ,कभी खेत बनें,
फल , मिट्टी , पानी, रेत बनें,
हम हर मौसम की छाया हों,
हर मौसम हममें समाया हो,
खुशियों की
यह रंगोली
तेरे सीने से
मेरे सीने तक |

ये चली
अटखेली ......

- Vishwa Deepak Lyricist

Friday, January 18, 2013

ज़िंदगी आपकी ज़मीन पर है चल पड़ी


ज़िंदगी जुए से है निकल पड़ी,
ज़िंदगी धुएँ से है निकल पड़ी..

ज़िंदगी अब होश में है,
आपकी ज़मीन पर चल रही है,
जोश में है..

फूल के लिबास में,
ओस के कयास में,
खुशबूओं से खेलती
जूही, अमलतास में,
ज़िंदगी
धूप की छुअन से है मचल पड़ी...

ज़िंदगी लिजलिजी धुंध से निकल पड़ी..

ज़िंदगी अशर्फ़ी हुई कारण आपके,
रूह में मिलाकर देह को खिला दूँ,
अनमोल बर्फ़ी हुई कारण आपके...

आपके..

ज़िंदगी आपकी आँख में है ढल पड़ी..

हारे हुए जुए से जीतकर निकल पड़ी,
काले हुए धुएँ से बीतकर निकल पड़ी,
ज़िंदगी आपकी ज़मीन पर जो चल पड़ी...

ज़िंदगी..

- Vishwa Deepak Lyricist

Tuesday, June 26, 2012

मौत तकरीबन


साँस में
उठते हुए धुएँ से कालिख काट के,
कैक्टस की शाख से काँटों का राशन छांट के,
रेत की बेचैनी को बहती नदी से बाँट के,
तालु की बिवाई और जिह्वा की दूरी पाट के
जी उठूँगा मैं जभी
जान लेना बस तभी
दर पे मेरे आई है...... मौत तकरीबन!!

आँख के
खलिहान की फसलों से पानी लूट के,
होश की अमराई पे मंजर चढा के झूठ के,
रीढ की चट्टान से पीपल के जैसे फूट के ,
रात की अलमारियों में नींद भर के, छूट के,
सो चलूँगा मैं जभी
जान लेना बस तभी
सर पे मेरे आई है..... मौत तकरीबन!!

- Vishwa Deepak Lyricist