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Sunday, February 04, 2018

तेरे सीने से मेरे सीने तक


वो चली
अटखेली
तेरे सीने से
मेरे सीने तक|

मैं होश बचाकर क्या जीतूँ ?
तुझे आँख चुराकर क्या हासिल?
हम मिलकर साँस -साँस बोएँ,
दो दिलके आस-पास बोएँ,
जन्मे तो दोनों का हिस्सा,
कुछ मेरा- कुछ तेरा किस्सा,
एक मीठी-सी
निम्बोली
तेरे सीने से
मेरे सीने तक|

तू बारिश हो ले भादो की
मैं अगहन की सौंधी-सी धूप ,
हम साथ-साथ थिरकें-ठिठकें
ले-लेकर एक-दूजे का रूप!
हम कभी मेंड़ ,कभी खेत बनें,
फल , मिट्टी , पानी, रेत बनें,
हम हर मौसम की छाया हों,
हर मौसम हममें समाया हो,
खुशियों की
यह रंगोली
तेरे सीने से
मेरे सीने तक |

ये चली
अटखेली ......

- Vishwa Deepak Lyricist

Wednesday, October 31, 2012

पत्थर पे इक पत्थर पड़ा


थोड़ा बुझा, थोड़ा उड़ा,
आँखों में जो सपना गिरा,
पत्थर पे इक पत्थर पड़ा,
झरने चले, लावा उड़ा..

अच्छा हुआ, जैसा हुआ,
कसमें खुलीं, किस्सा खुला,
रस्में खुलीं, रस्ता खुला,
सहरा तले दरिया खुला..

- Vishwa Deepak Lyricist