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Tuesday, December 04, 2012

वह ज्यादातर चुप रहता है


उसने अपनी सारी आदतें उतार दीं हैं मेरे कारण...

अब वह बिगड़ने से पहले देख लेता है मेरा "मूड"..

हँसता ज्यादा है आजकल,
ज्यादातर खुद पर...

अकेले में बाँटना चाहता है ग़म मुझ से
और रख देता है दिल खोलकर..

वह अब मेरी "कड़वी" बातें भी सुन लेता है
और झुका लेता है सर...

वह झुका लेता है सर
और चिढ जाता हूँ मैं..

चिढता था मैं पहले भी,
जब वह ऐसा कतई न था..

वह बदल गया है
लेकिन मैं नहीं बदला...

वह जो मेरा "पिता" है,
मुझे आज भी लाजवाब कर जाता है!!!

- Vishwa Deepak Lyricist

Monday, October 29, 2012

कह कि तेरे कहने से..


कह कि तेरे कहने से कहना बुरा हो जाएगा,
कह कि तेरे कहने से चुप्पी का सूरज छाएगा...

कह कि तेरे कहने की बातें बड़ी बड़बोली हैं,
कह कि तेरे कहने की आदत न नापी-तौली है..

कह कि तेरे कहने से नीयत का रंग खुल जाएगा,
कह कि तेरे कहने से मुझको सबक मिल जाएगा...

- Vishwa Deepak Lyricist

Friday, July 06, 2012

बोलिए तो


बदचलन मेरी आदतें
गर आपकी
अर्दली हो जाएँ तो
मेरे माथे पे चढाया
बेहयाई का ये परचम
कुछ झुकेगा
या नहीं?

बोलिए तो...

आपकी गर मानें तो
मेरी इन हथेलियों के
आड़े-टेढे रास्तों पे
जो उतरते हीं नहीं है
आफताबी सात घोड़े
वो मेरी बदरंग तबियत
की मेहर है..
इसलिए गर
आपकी तदबीर से
माँगकर कुछ कोलतार
डाल दूँ इन
सरफिरी पगडंडियों पे
और कर दूँ
पक्की सड़कें मैं इन्हें
तो मेरी
माटी भरी तकदीर का
हो पड़ेगा काया-कल्प
या नहीं?

बोलिए तो...

बदसलूकी करते मेरे
अल्फ़ाज़ ये
आपके हम्माम में
धुलने लगें हर रोज़ तो
"बेरूखी" और "बेबसी" के हर्फ़ सब
बह जाएँगें..
यूँ हुआ तो
आपके खलिहान के
किसी छोर पे
इक लेखनी के वास्ते
एक-आध हीं सरकंडे मेरे
बोलिए
उग पाएँगे
या नहीं?

बोलिए तो...

- Vishwa Deepak Lyricist