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Tuesday, December 04, 2012

वह ज्यादातर चुप रहता है


उसने अपनी सारी आदतें उतार दीं हैं मेरे कारण...

अब वह बिगड़ने से पहले देख लेता है मेरा "मूड"..

हँसता ज्यादा है आजकल,
ज्यादातर खुद पर...

अकेले में बाँटना चाहता है ग़म मुझ से
और रख देता है दिल खोलकर..

वह अब मेरी "कड़वी" बातें भी सुन लेता है
और झुका लेता है सर...

वह झुका लेता है सर
और चिढ जाता हूँ मैं..

चिढता था मैं पहले भी,
जब वह ऐसा कतई न था..

वह बदल गया है
लेकिन मैं नहीं बदला...

वह जो मेरा "पिता" है,
मुझे आज भी लाजवाब कर जाता है!!!

- Vishwa Deepak Lyricist

Wednesday, August 29, 2012

शुक्रिया


सद्यजन्मा भाई को गोद लिए
जब पूछेगी वो
कि
"अब तो खुश ना?
अब तो नहीं कटेंगी ना मेरी परछाईयाँ?",
तो क्या जवाब दोगे तुम?

क्या जवाब दोगे तुम
गर वो कुछ पूछे हीं नहीं,
बस निहारे अपने भाई को एकटक
और दबी ज़बान में कहे -
"बड़ी देर की आने में.... खैर... शुक्रिया!"

- Vishwa Deepak Lyricist