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Tuesday, October 16, 2012

मेरी आँखों में सारे साहिल हैं


चाँद पत्थर है,
आसमां पानी,
रात लहरों का उठना-गिरना है...

रात उतरेगी,
आके मुझमें हीं.
मेरी आँखों में सारे साहिल हैं...

चाँद भारी है..
चोट तीखी है..

मेरी यादें हैं...... उसने फेंकी हैं...

- Vishwa Deepak Lyricist

Saturday, September 22, 2012

ख़ुदा ने इश्क़ लिख भेजा था उनमें


आज तोड़ डालो मुझे परत-दर-परत
कि मैं बामियान के बुद्ध-सा निर्लज्ज खड़ा हूँ..

होते में हूँ तुम्हारे, अहाते में हूँ तुम्हारे..

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इस बार मैं जो आऊँ तो मकसद न पूछना,
बस घर को घूर लेना, मैं लौट जाऊँ जब..

दो-चार गर्द होंगे कम, दो-चार रंग जियादा

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बस करवटों में रात चली जाएगी शायद,
मैं साहिलों पे डूबता-उठता हीं रहूँगा?

इन सलवटों में एक किनारा तो हो तेरा...

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लिफाफे जिस्म के खोले बहुत पर,
कहीं भी रुह की चिट्ठी पढी तूने नहीं...

खुदा ने "इश्क़" लिख भेजा था उनमें...

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न मैं "मेहमान" हो पाया उस घर का,
न तुम हीं "परिवार" हो पाई मेरी..

दोनों घर अजनबी हो गए..बस...

- Vishwa Deepak Lyricist

Tuesday, August 14, 2012

मैं, तू, खला, खालीपन और मौत


मुझमें ढूँढे तू खालीपन?

मैं तुझसे तुझतक फैला हूँ!

मैं हूँ तो तू खाली कैसे?
तू है तो मैं खाली कैसे?

ना खला कहीं... हरसू हम हैं..

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तुझसे होकर मैं यूँ गुजर जाऊँ,
तेरी बाहों में सोऊँ, मर जाऊँ...

इक सिरा मेरी रूह का
अटका हो मेरे सहरे से
दूसरा सिरा लेके मैं
तेरे साहिलों से उतर जाऊँ..

तेरी बाहों में सोऊँ.. मर जाऊँ..

तू काँटें दे या फूल हीं
या बंद कर ले पंखुड़ी
मैं ओस बनके आज तो
तेरी क्यारियों में बिखर जाऊँ..

तेरी बाहों में सोऊँ.. मर जाऊँ..

- Vishwa Deepak Lyricist