यह भी तो हद है कि हद जानता नहीं मैं,
ज़िंदा हूँ और ज़िंदगी को मानता नहीं मै।
पल हीं में राख कर दूँ मैं सूरज के शरारे,
कुव्वत है फिर भी बेवजह ठानता नहीं मैं।
अब होश है तो वक्त की भी खैर-खबर लूँ,
ऐसे तो दिन-महीने भी पहचानता नहीं मैं।
______________________________
क़ज़ा आना तो यूँ आना कि दुनिया को खबर न हो,
बिना मतलब की बातों से तेरा जीना दुभर न हो।
__________________________
खुदा मेरी खुदी का जो तलबगार हो गया,
बिना कहे कोई मेरा मददगार हो गया।
__________________________
इश्क उन आँखों को ज़ीनत देता है,
गुफ़्तगू की हद तक हसरत देता है।
मैं नज़रें कभी फ़ेरता हीं नहीं,
भरसक वो मुझे मोहलत देता है।
बस बन जाते हैं सच्चे-से बहाने,
वक्त दोस्तों को ये बरकत देता है।
नब्ज थमते हीं सुकूँ आ जाएगा,
होश ऐसे किधर फुरसत देता है।
______________________________
करीने से मुझे सोचे , गया हर वक्त याद हो,
तभी तो जां मिले मुझको, तबियत मेरी शाद हो।
-विश्व दीपक
Thursday, October 29, 2009
Monday, October 05, 2009
चुपचाप
मैं चुपचाप फिरता हीं रहा!
ना चाँद को कोई थपकी दी,
ना दूब की तोड़ी कमर,
ना साँस को दी आहटें,
ना नींद की खींची चुनर,
बस एक तुम्हारे ख्वाब में-
चुपचाप फिरता हीं रहा।
मैं जहाँ था, उस जहां में चाहतों की चाशनी थी,
पक रही थी, रात जिस में ,मीठी-मीठी चाँदनी थी,
साँवला-सा आसमां था,
कुछ-कुछ तेरी आँखों-सा था,
और उसकी तलछटी में
ख्वाब कोई बुन रहा था।
सौंधी-सौंधी शबनमी-सी,
पीली-पीली रोशनी-सी,
मिट्टी दिल की घुल रही थी,
धुल रहा था मैं वहीं पर
तू वहीं पर खुल रही थी।
क्या कहूँ मैं, क्या हुआ जब, शब तले हम दो मिले,
यूँ लगा कि, बस तुम्हीं से, तारों के हैं काफ़िले,
मनचला जो आसमां था,
सब तुम्हीं को दे रहा था।
गीली-गीली संदली-सी ,
भीनी-भीनी अंबरी-सी,
खुशबू छन के उड़ रही थी,
मुड़ रहा था दिन वहीं पर,
रूत सुबह से जुड़ रही थी।
मैं चुपचाप फिरता हीं रहा।
-विश्व दीपक ’तन्हा’
Wednesday, September 16, 2009
मेरे खुदा (एक हीं गाना दो रूपों में)
१) यथार्थपरक (realistic)
मुखड़ा:
male:
तू हीं बता, मेरा जहां, तेरे सिवा, होगा कहीं,
बांटे कोई , दर्द-ए-निहां, ऐसा खुदा, होगा कहीं।
female:
तू है मेरा, यही सदा, यही दुआ, होगी मेरी,
तेरी हँसी, तेरी खुशी, मेरे खुदा, होगी मेरी।
अंतरा 1:
female:
ऐसी कहाँ ,होती फ़िज़ा, तू जो यहाँ, होता नहीं,
male:
तेरे बिना, मेरा कहीं, नामो-निशां, होता नहीं।
female:
है ये यकीं, या है गुमां, तू है वफ़ा, मेरे लिए,
male:
वाह रे अदा, तू जो हुई, मुझसे खफ़ा, मेरे लिए।
female:
तू है मेरा, यही सदा, यही दुआ, होगी मेरी.
male:
तू हीं बता, मेरा जहां, तेरे सिवा, होगा कहीं।
अंतरा 2:
male:
मुझको मिली, जो भी खुदी, माह-जबीं, वो है तेरी,
female:
मेरी सभी, नेकी बदी, शाह-ए-जमीं, वो है तेरी।
male:
आओ चलें, साँसों तले, दूजा जहाँ, कोई न हो,
female:
नूर-ए-खुदा, रवाँ रहे, झूठा जहाँ, कोई न हो।
male:
तू हीं बता, मेरा जहां, तेरे सिवा, होगा कहीं,
female:
तू है मेरा, यही सदा, यही दुआ, होगी मेरी|
male:
तू हीं बता, मेरा जहां, तेरे सिवा, होगा कहीं,
बांटे कोई , दर्द-ए-निहां, ऐसा खुदा, होगा कहीं।
female:
तू है मेरा, यही सदा, यही दुआ, होगी मेरी,
तेरी हँसी, तेरी खुशी, मेरे खुदा, होगी मेरी।
अंतरा 1:
female:
ऐसी कहाँ ,होती फ़िज़ा, तू जो यहाँ, होता नहीं,
male:
तेरे बिना, मेरा कहीं, नामो-निशां, होता नहीं।
female:
है ये यकीं, या है गुमां, तू है वफ़ा, मेरे लिए,
male:
वाह रे अदा, तू जो हुई, मुझसे खफ़ा, मेरे लिए।
female:
तू है मेरा, यही सदा, यही दुआ, होगी मेरी.
male:
तू हीं बता, मेरा जहां, तेरे सिवा, होगा कहीं।
अंतरा 2:
male:
मुझको मिली, जो भी खुदी, माह-जबीं, वो है तेरी,
female:
मेरी सभी, नेकी बदी, शाह-ए-जमीं, वो है तेरी।
male:
आओ चलें, साँसों तले, दूजा जहाँ, कोई न हो,
female:
नूर-ए-खुदा, रवाँ रहे, झूठा जहाँ, कोई न हो।
male:
तू हीं बता, मेरा जहां, तेरे सिवा, होगा कहीं,
female:
तू है मेरा, यही सदा, यही दुआ, होगी मेरी|
२) काल्पनिक (fantasy)
मुखड़ा:
male:
यूँ हीं कभी, हो जाए यूँ, तू हो यहाँ, कोई न हो,
मैं बस सुनूँ, तेरी सदा, बाते तेरीं, सोई न हो।
female:
यूँ हीं कभी, हो जाए यूँ, पूरी सदी, पल में खुले,
उमड़े यहाँ, अब्र-ए-नशा, सारा जहां, हममें घुले।
अंतरा 1:
female:
तेरी हँसी , ओढूँ कभी, रूह में तेरी, सो लूँ कभी,
male:
तुझको रखे, बाहों में जो, मैं वो हवा, हो लूँ कभी।
female:
तेरे दिल से, मेरे दिल तक, डालें कभी, रस्ता कोई,
male:
रत्ती भर भी, दूरी हो तो, रहने न दें, दरिया कोई।
मेरे खुदा........................
अंतरा 2:
male:
तेरे लब पे, गुलमोहर की, सुर्ख कली, खिलती रहे,
female:
तेरी जाँ से, साँसें मेरी, बनके नदी, मिलती रहे।
male:
तू जो अगर , धरती न दे, तलवों तले, सूई चुभे,
female:
रेशम भी तो, खार बने, तेरे बिना, रूई चुभे।
मेरे खुदा........................
male:
यूँ हीं कभी, हो जाए यूँ, बाद-ए-सबा, तुझसे चले।
female:
यूँ हीं कभी, हो जाए यूँ, ज़िक्र-ए-वफ़ा, तुझपे ढले।
मेरे खुदा..............
male:
यूँ हीं कभी, हो जाए यूँ, तू हो यहाँ, कोई न हो,
मैं बस सुनूँ, तेरी सदा, बाते तेरीं, सोई न हो।
female:
यूँ हीं कभी, हो जाए यूँ, पूरी सदी, पल में खुले,
उमड़े यहाँ, अब्र-ए-नशा, सारा जहां, हममें घुले।
अंतरा 1:
female:
तेरी हँसी , ओढूँ कभी, रूह में तेरी, सो लूँ कभी,
male:
तुझको रखे, बाहों में जो, मैं वो हवा, हो लूँ कभी।
female:
तेरे दिल से, मेरे दिल तक, डालें कभी, रस्ता कोई,
male:
रत्ती भर भी, दूरी हो तो, रहने न दें, दरिया कोई।
मेरे खुदा........................
अंतरा 2:
male:
तेरे लब पे, गुलमोहर की, सुर्ख कली, खिलती रहे,
female:
तेरी जाँ से, साँसें मेरी, बनके नदी, मिलती रहे।
male:
तू जो अगर , धरती न दे, तलवों तले, सूई चुभे,
female:
रेशम भी तो, खार बने, तेरे बिना, रूई चुभे।
मेरे खुदा........................
male:
यूँ हीं कभी, हो जाए यूँ, बाद-ए-सबा, तुझसे चले।
female:
यूँ हीं कभी, हो जाए यूँ, ज़िक्र-ए-वफ़ा, तुझपे ढले।
मेरे खुदा..............
-विश्व दीपक ’तन्हा’
प्रेयसी (एक नए अंदाज़ में)
मुखड़ा:
female:
बस तुझे, हाँ तुझे, देखूँ शामो-सुबह,
तू रहे, सामने, जी लूँ पूरी तरह।
male:
क्या कहूँ, मैं तुझे, मैं हूँ जो भी यहाँ,
रब की सौं, तू हीं है, सब की सारी वज़ह।
female:
इतनी-सी, बात है, तू है मेरा जहां।
अंतरा 1:
female:
ये तो कभी हुआ नहीं, मुझे अपनी फ़िक्र हीं ना रहे।
male:
तुझे पाके हुआ वही, कहीं जिसका जिक्र हीं ना रहे।
female:
आज हीं पाई है, मैने ऐसी दुआ,
तूने ज्योंहि छुआ,
कुछ न कुछ है हुआ।
male:
मैने भी तुझसे हीं सीखी है ये अदा,
सब कहें, प्यार पर, है ये कोई खुदा।
अंतरा 2:
male:
यूँ हीं नहीं तुझे चाहूँ, मुझे तुझमें जश्न कोई दिखे।
female:
है ये वही तेरी चाहत, मुझे जिसमें अगन कोई दिखे।
male:
मेरी तू, तेरा मैं, सच है सनम यही,
अब ये कसम रही,
हो ना जुदा कभी।
female:
बस तुझे, हाँ तुझे, देखूँ शामो-सुबह,
तू रहे, सामने, जी लूँ पूरी तरह।
male:
क्या कहूँ, मैं तुझे, मैं हूँ जो भी यहाँ,
रब की सौं, तू हीं है, सब की सारी वज़ह।
female:
इतनी-सी, बात है, तू है मेरा जहां।
female:
बस तुझे, हाँ तुझे, देखूँ शामो-सुबह,
तू रहे, सामने, जी लूँ पूरी तरह।
male:
क्या कहूँ, मैं तुझे, मैं हूँ जो भी यहाँ,
रब की सौं, तू हीं है, सब की सारी वज़ह।
female:
इतनी-सी, बात है, तू है मेरा जहां।
अंतरा 1:
female:
ये तो कभी हुआ नहीं, मुझे अपनी फ़िक्र हीं ना रहे।
male:
तुझे पाके हुआ वही, कहीं जिसका जिक्र हीं ना रहे।
female:
आज हीं पाई है, मैने ऐसी दुआ,
तूने ज्योंहि छुआ,
कुछ न कुछ है हुआ।
male:
मैने भी तुझसे हीं सीखी है ये अदा,
सब कहें, प्यार पर, है ये कोई खुदा।
अंतरा 2:
male:
यूँ हीं नहीं तुझे चाहूँ, मुझे तुझमें जश्न कोई दिखे।
female:
है ये वही तेरी चाहत, मुझे जिसमें अगन कोई दिखे।
male:
मेरी तू, तेरा मैं, सच है सनम यही,
अब ये कसम रही,
हो ना जुदा कभी।
female:
बस तुझे, हाँ तुझे, देखूँ शामो-सुबह,
तू रहे, सामने, जी लूँ पूरी तरह।
male:
क्या कहूँ, मैं तुझे, मैं हूँ जो भी यहाँ,
रब की सौं, तू हीं है, सब की सारी वज़ह।
female:
इतनी-सी, बात है, तू है मेरा जहां।
-विश्व दीपक ’तन्हा’
Monday, September 14, 2009
प्रेयसी (एक नया गीत)
मुखड़ा:
female:
शौक़ से साँसों में तेरी आहें रहे,
रात-दिन आँखों में तेरी बातें बहे।
male:
दुधिया चाँद जो सारी रैना चले,
देखके तुझको हीं हौले-हौले जले।
female:
तू जो है साथ में तो क्या कोई छले।
अंतरा 1:
female:
कोई कमी किसी तरह मेरी वफ़ा में जन्म न हो कभी,
male:
नहीं कोई तेरे जैसी तेरी खुशियाँ खत्म न हो कभी।
female:
लाज की आखिरी धानी चुनर तू हीं,
बाली उमर तू हीं,
सीधी डगर तू हीं।
male:
तो अभी प्रेयसी आओ ऐसा करें,
खोल के जिस्म को प्यार सारा भरें।
अंतरा 2:
male:
तेरा दरस मिले सदा मेरी दुनिया तुझी से हो शुरू,
female:
सोचूँ तुझे ख्वाबों तले मेरी निंदिया तुझी से हो शुरू।
male:
होश की मखमली पीली सुबह तू हीं,
गीली सतह तू हीं,
पूरी वज़ह तू हीं।
female:
शौक़ से साँसों में तेरी आहें रहे,
रात-दिन आँखों में तेरी बातें बहे।
male:
दुधिया चाँद जो सारी रैना चले,
देखके तुझको हीं हौले-हौले चले।
female:
तू जो है साथ में तो क्या कोई छले।
female:
शौक़ से साँसों में तेरी आहें रहे,
रात-दिन आँखों में तेरी बातें बहे।
male:
दुधिया चाँद जो सारी रैना चले,
देखके तुझको हीं हौले-हौले जले।
female:
तू जो है साथ में तो क्या कोई छले।
अंतरा 1:
female:
कोई कमी किसी तरह मेरी वफ़ा में जन्म न हो कभी,
male:
नहीं कोई तेरे जैसी तेरी खुशियाँ खत्म न हो कभी।
female:
लाज की आखिरी धानी चुनर तू हीं,
बाली उमर तू हीं,
सीधी डगर तू हीं।
male:
तो अभी प्रेयसी आओ ऐसा करें,
खोल के जिस्म को प्यार सारा भरें।
अंतरा 2:
male:
तेरा दरस मिले सदा मेरी दुनिया तुझी से हो शुरू,
female:
सोचूँ तुझे ख्वाबों तले मेरी निंदिया तुझी से हो शुरू।
male:
होश की मखमली पीली सुबह तू हीं,
गीली सतह तू हीं,
पूरी वज़ह तू हीं।
female:
शौक़ से साँसों में तेरी आहें रहे,
रात-दिन आँखों में तेरी बातें बहे।
male:
दुधिया चाँद जो सारी रैना चले,
देखके तुझको हीं हौले-हौले चले।
female:
तू जो है साथ में तो क्या कोई छले।
-विश्व दीपक ’तन्हा’
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