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Monday, August 20, 2012

ईद मुबारक


आज आए तुम,
मेरे कान खींचे,
कुछ फुसफुसाए
और निकल लिए...

मैं अभी तक सोंच में हूँ
कि तुमने समझाया मुझे
या बहका दिया... पिछली बार-सा..

कहीं फिर से मैं
एक-आध हँसी के बाद
सीख न लूँ खुश रहना...

इस ईद भी!!!

- Vishwa Deepak Lyricist

Sunday, August 19, 2012

चूहे खाएगी


आँख उतर रही है सीढियों से,
नींद चढ जाएगी ऊपर..दबे पाँव..बिल्लियों की तरह...

घंटियाँ ख्वाब की बँधी हों तो ज़रा चौंकूं भी...

घंटियाँ ख्वाब की गूंगी हैं, बहरी आँखें हैं,
नींद मखमल है तलवों तक रेशों से..

कौन रोकेगा? चढेगी माथे में.... चूहे खाएगी..

चूहे खाएगी,
सोंच खाएगी,
नोंच खाएगी,
रोज़ खाएगी,
आँख उतरते-उतरते... उतर जाएगी...

- Vishwa Deepak Lyricist