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Monday, November 05, 2012

फिर भी तुम्हारा हूँ


अब भी वहीं से पुकारती हो!!

दस कदम पीछे हटकर
उतर जाओ रास्ते से
या दस कदम बढकर
मुड़ जाओ मेरी तरफ...

यह कशमकश तोड़ो!!

जान लो -
मैं गुजर गया हूँ,
फिर भी तुम्हारा हूँ....

.
.
.

बँधा हूँ तुम्हारे अहद से,
इसलिए........ खुद लौट नहीं सकता!!!!

- Vishwa Deepak Lyricist

Saturday, October 27, 2012

हर अहद मेरा


चलो मान लिया
कि
तुम सच हो,
हर सोच तुम्हारी सच्ची है...

तो मान भी लो -
हर अहद मेरा
सच्चा है बिल्कुल तुम-सा हीं,
क्योंकि जो भी कुछ मेरा है
सब जुड़ा तुम्हारी सोच से है,
सब बना तुम्हारी सोच से है...

मैं भी अब अलग कहाँ तुमसे...
जो तुम सच तो मैं भी सच हूँ

- Vishwa Deepak Lyricist