अब भी वहीं से पुकारती हो!!
दस कदम पीछे हटकर
उतर जाओ रास्ते से
या दस कदम बढकर
मुड़ जाओ मेरी तरफ...
यह कशमकश तोड़ो!!
जान लो -
मैं गुजर गया हूँ,
फिर भी तुम्हारा हूँ....
.
.
.
बँधा हूँ तुम्हारे अहद से,
इसलिए........ खुद लौट नहीं सकता!!!!
- Vishwa Deepak Lyricist