Monday, November 05, 2012

फिर भी तुम्हारा हूँ


अब भी वहीं से पुकारती हो!!

दस कदम पीछे हटकर
उतर जाओ रास्ते से
या दस कदम बढकर
मुड़ जाओ मेरी तरफ...

यह कशमकश तोड़ो!!

जान लो -
मैं गुजर गया हूँ,
फिर भी तुम्हारा हूँ....

.
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बँधा हूँ तुम्हारे अहद से,
इसलिए........ खुद लौट नहीं सकता!!!!

- Vishwa Deepak Lyricist

3 comments:

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार 6/11/12 को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका स्वागत है ।

विश्व दीपक said...

शुक्रिया राजेश जी...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वन-वे ट्रैफिक?