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Tuesday, February 14, 2017

राष्ट्रद्रोह


राष्ट्रद्रोह का आरोपण!
.
नाखून तक न कटाकर शहीद कहलाने वालों का
'तुरूप का इक्का',
रेत में सर डाले शुतुरमुर्ग के लिेए रामबाण सुरक्षा-कवच,
बवासीर-वादियों का 'लवण-भास्कर चूर्ण'...
.
राष्ट्रद्रोह का हर सुबह उच्चारण
जगाता है एक नई स्फूर्ति,
पल में करता है छू
गूढ से गुह्यतम हर-एक गुप्त रोग;
जागृत करता है कुंडलिनी
जिह्वा के इर्द-गिर्द...
.
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राष्ट्रद्रोह के पैमानें
भोले हैं,
मुहरें
हैं सुलभ,
चश्में
सुसंस्कृत!
.
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मैं जीवित हूँ
जीजिविषा के साथ
और इसीलिए
तुम्हारी लेखनी आतुर है
डुबोने के लिए
इसे
अपराध की किसी-न-किसी श्रेणी में......

- Vishwa Deepak Lyricist

Friday, August 17, 2012

शुतुरमुर्ग रेत में


तालीम के सरमायेदार!
बेरोज़गार फिर रहे
हैं लफ़्ज़ बेमानी हज़ार...

सूखे की मार!!

आँखों में दरिया काट के
जब से दिया सहरा उतार..
तालीम क्या, तहरीर क्या,
तहज़ीब... नाउम्मीदवार..

जा रे सुखनवर
अबकी बार,
बनके शुतुरमुर्ग रेत में
सर डालना जो ज़ार-ज़ार,
एक बूंद भर हीं थूक में
हो जाना गर्क बेइख्तियार...

ईमां के पार..

हैं कूच कर गए सभी
दानिश्वर क़ुव्वत उजाड़..

तालीम के सरमायेदार,
तारीक़ के सरमायेदार..

- Vishwa Deepak Lyricist