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Monday, August 13, 2012

तुम और मैं.. दो क्षणिकाएँ


गर
मालूम हो कि
दो कदम पर मौत हो
और
कदम दर कदम
तुम चल रही हो साथ मेरे...

तो
किस तरह
उतार दूँ ज़िंदगी?

तुम्हारा रहना
कचोटता रहेगा मुझे
और
तुम्हारा जाना
भी तो
मौत से कम नहीं....

____________________


तुम्हें छोड़ आया हूँ वहीं
जहाँ तुमने कभी छोड़ा था मुझे...

अबकी बार
चलो
साथ चलें दोनों
और लौट आएँ अपने-अपने रास्ते..

फिर
न तुम पर कोई इल्जाम,
न मुझ पर कोई इल्जाम...

- Vishwa Deepak Lyricist

Saturday, July 10, 2010

ओवर रेटेड


तुम्हारा मिलना मौत की तरह चुपचाप होगा...

हाँ, ये यकीन है कि
मौत मिलेगी
और तुम?
शायद हीं....
या नहीं

इसलिए
फिक्र मौत की नहीं
तुम्हारी होनी चाहिए...

मौत तो "ओवर रेटेड" है..


-विश्व दीपक