Monday, August 09, 2021

बेटी

बेटी! तुम रोज़ आकाश गढ़ती रहना। मैं तुम्हारे साथ, तुम्हारे लिए बेझिझक उड़ता रहूँगा। . अपनी गोद खुली रखना जहाँ मेैं खुलकर हँस सकूँ, रो सकूँ, भरपूर रो सकूँ। . सकुचाए हुए रिश्ते सिकुड़ जाते हैं। तुम दोस्त रहना! . बेटियों! न कमना, न थमना। बढना और बढ़ते हुए नज़र ऊँची रखना। . तुम इस पिता की सृष्टि की दो सुंदर कृतियाँ हो।

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