Thursday, February 08, 2007

कठफोड़्वा

रूह काट कर, नमक डाल कर रखा है,
तुम्हारे दर्द को अपने दर्द से चखा है।

पत्थर हूँ,पत्थरों का अहसानमंद हूँ,
सीने की आग साँसों में संभाल कर रखा है।

हिंदू हूँ, मुसलमां से रश्क क्यों रखूँ,
खुदा ने खून संग-संग उबाल कर रखा है।

हाकिम से वक्त लेकर दुनिया में हूँ आया,
रकीबों ने मेरे वास्ते जाल कर रखा है।

हैं लाख के घरोंदे , कई लाख जिस्म हैं,
इक नाम ने माचिस से बवाल कर रखा है।

मंदिर में नमाजी हैं ,मस्जिद में पुजारी,
इस मौत ने धर्म से सवाल कर रखा है।

कठफोड़वा बना है 'तन्हा' क्या आजकल,
काठ की आँखों पर करवाल कर रखा है।

-विश्व दीपक 'तन्हा'

9 comments:

Raviratlami said...

बढ़िया ग़ज़ल.

गिरिराज जोशी "कविराज" said...

तन्हाजी बहुत ही उम्दा ग़ज़ल. हाँ रविजी की टिप्पणी के बाद यह स्पष्ट है कि यह ग़ज़ल ही है ना की ग़ज़लनुमा रचना.

बधाई स्वीकार करें।

amrendra said...

"इक नाम ने माचिस से बवाल कर रखा है।"
gazal hai ya gazalnuma. Fir se wahi sawal..... 'Naam' ka. ye jo bhi hai par hum - aap कठफोड़वा nahin..Agar कठफोड़वा hote to shayad
in 60 salon men is kaath ko bhed diye hote.....
Bahut sahi Tanha kavi .......

Alok said...

metamorphosis realising at the time when it matters... Trust, your life snap - will surely cheer you ..

shrdh said...

रूह काट कर, नमक डाल कर रखा है,
तुम्हारे दर्द को अपने दर्द से चखा है।
kya kahun wahhhhhhhh wahhhhhhhh tumhare dard ko apne dard se chakha hai kya baat kahe gaye ho saheb ji


पत्थर हूँ,पत्थरों का अहसानमंद हूँ,
सीने की आग साँसों में संभाल कर रखा है।

aag aur saanson mai kamaal hai ji

हिंदू हूँ, मुसलमां से रश्क क्यों रखूँ,
खुदा ने खून संग-संग उबाल कर रखा है।

baat gahri kahi hai

हाकिम से वक्त लेकर दुनिया में हूँ आया,
रकीबों ने मेरे वास्ते जाल कर रखा है।


हैं लाख के घरोंदे , कई लाख जिस्म हैं,
इक नाम ने माचिस से बवाल कर रखा है।

machis se babaal kar rakha hai

मंदिर में नमाजी हैं ,मस्जिद में पुजारी,
इस मौत ने धर्म से सवाल कर रखा है।

कठफोड़वा बना है 'तन्हा' क्या आजकल,
काठ की आँखों पर करवाल कर रखा है।

bhaut bhaut pasand aayi aapki gazal

Shrish said...

"हाकिम से वक्त लेकर दुनिया में हूँ आया,
रकीबों ने मेरे वास्ते जाल कर रखा है।"


वाह वाह, क्या बात कही है।

मोहिन्दर कुमार said...

तन्हा जी

जीवन मंथन का सार लिख डाला आप ने
शब्दों में गहरायी है
हमें आप की यह गजल बहुत पसंद आयी है

Anonymous said...

abe tanha,
tu kownsa software use karta hai hindi likhne ke liye.......??
pura kavita ka mazaa chale jaata hai agar thik se na likha jaye to....
use a better software....
keep up the tempo......
VD ka temp[o high hai........
aage badte raho.....
kalam chalate raho......
...........................bhoga

Bhag1 Behera said...

wah wah wah
kya likhte ho tanha bhai.
majaa aa gaaya.
kahaan se topa ye sab?????
batao na pllz.