Monday, February 01, 2010

उठाईये जब भी चिलमन को


संभालिए दिल की धड़कन को,
उठाईये जब भी चिलमन को...

तराशिए अपनी बातों को,
संवारिये पगली उलझन को....

बताईये अपनी आँखों से,
दबाईये यूँ ना तड़पन को....

मनाईये रूठी साँसों को,
भुलाईये सारी अनबन को....

निभाईये वादे चाहत के,
लगाईये मन से तन-मन को...

पुकारिए खुल के ख़ाबों को,
बुहारिये बिखरी कतरन को...

सजाईये खुद को कुरबत से,
हटाईये ग़म की उतरन को...


-विश्व दीपक

2 comments:

Amit said...

awesom,lazabab,maza aya padh ke.........unspected pahli war aapki itni kavitayen padhi.tanha kavi ko meri or se subhkamnayen..... AMIT PRAKASH(APS)

विश्व दीपक said...

shukriya bhai saaheb :)