Tuesday, December 22, 2009

मस्ती के पंगे


चंगे....मस्ती के पंगे..

मुट्ठी में मन?
तौबा!!
झूठे बंधन?
तौबा!!
बासी राशन?
तौबा!!
जाली शासन?
तौबा!!
अकड़म-बकड़म ऐं वैं
दुनिया को बेड़ी दे के,
खुल्लम खुल्ला जी ले
तू सब को एंड़ी दे के।

बेबस दुश्मन
वाह-वाह!!
कातर जोखम
वाह-वाह!!
मुर्दा चिलमन
वाह-वाह!!
पुख्ता जीवन
वाह-वाह!!
चुनकर-बुनकर रख ले
इस पल को साफी दे के,
हँसकर कसकर जी ले
तू सब को माफी दे के।

पंगों की रात...
ज़िंदाबाद!!!


-विश्व दीपक